// Pearl Farming

// Agribusiness Wiki

Wiki Of Pearl Farming

मौक्तिक,मोती या मुक्ता वो मनोहारी रत्न है जिसे रत्नों की रानी भी कहा जाता है। ये वो रत्न है जो सीपी के बेहद मुलायम ऊतकों से बनता है। कुछ विशेष प्रकार के मोतियों का उपयोग तो खाद्य पदार्थों, औषधियों और टॉनिकों में भी किया जाता है। समृद्धि, स्वास्थ्य, और सौन्दर्य के प्रतीक मोती को आधुनिक तकनीकों से सीपियों में विकसित किया जा सकता है। आज विश्व में लगभग सारा का सारा मोती उत्पादन इन्हीं तकनीकों से किया जाता है। मनुष्य द्वारा सीपियों में अपनी आवश्यकता अनुसार मोती विकसित करने की प्रक्रिया को ही मोती की खेती कहते हैं।
जीव वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो मोती वास्तव में सीपी की खोल की सामग्री का ही रूप है। प्राकृतिक रूप से ये तब बनता है जब सीपी के शरीर के अंदर मुलायम ऊतकों में कोई बाहरी कण फंस जाता है। सीपी की खेती में सीपी के शरीर में सुरक्षित सर्जरी द्वारा बाहरी कण आरोपित किया जाता है जो मोती बनने का केन्द्र बन जाता है। यही विकसित मोती इसकी खेती करने वाले किसान के लिए आय का स्रोत होता है। यदि आप के आस पास पानी से भरे प्राकृतिक या निर्मित गड्ढे हैं तो आप भी सीपियों में मोती उगाकर लाभ ले सकते हैं। सोने पे सुहागा ये कि सीपियों में मोती उगाने के साथ साथ मछली पालन भी किया जा सकता है इन गड्ढों में।

मशरूम की खेती के मुख्य पाँच चरण हैं-

लगभग 50 हजार रूपयों से 1000 सीपियों से शुरू कर के उचित परिस्थियों में साल भर में ढाई लाख तक की आमदनी पाई जा सकती है। इस तरह देखें तो काफी कम लागत से मोती पालन शुरू किया जा सकता है और थोड़े से धैर्य और श्रम से अच्छी कमाई की जा सकती है। आवश्यक है की ये उद्यम शुरू करने से पहले इसके लिए उचित प्रशिक्षण ले लिया जाए।

भारत में मोती की खेती के लिए सीपी पालन का प्रशिक्षण सीआईएफए यानि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर (CIFA),भुवनेश्वर (ओडिशा) से प्राप्त किया जा सकता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए आप निम्नांकित पते पर संपर्क कर सकते है-
निदेशक
आई सी ए आर –सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर
कौसल्यगंगा, भुवनेश्वर – 751002, ओडिशा, भारत
फोन: 91-674-2465421,2465446 फैक्स: 91-674-2465407
ई -मेल: Director.Cifa@icar.gov.in(link sends e-mail), वेब साइट: www.cifa.nic.in

ये प्रशिक्षण लगभग एक सप्ताह का होता है और मोती की खेती का उद्यम शुरू करने के लिए उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त कई निजी संस्थाएं भी इस उद्यम के लिए प्रशिक्षण देती हैं। किसी भी प्रतिष्ठित संस्था से प्रशिक्षण लेकर इस उद्यम को शुरू किया जा सकता है। इस संबंध में अग्रिकाश के विशेषज्ञों से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए फोन नंबर 9415698328 पर कॉल करें या info@agrikaash.com पर संपर्क करें।

मोती के लिए सीपी पालन की प्रक्रिया को संक्षिप्त रूप में इन चरणों में बाँट जा सकता है:

  1. लगभग 10 गुणे 10 फीट क्षेत्रफल और लगभग 6 फीट गहरे तालाब से भी मोती पालन का उद्यम शुरू किया जा सकता है।
  2. इनमें जिलाने के लिए सीपियाँ को एकत्रित करना होगा या सीपियाँ खरीदी भी जा सकती हैं।
  3. सीपियों के स्वास्थ्य और भोजन के लिए के कुछ उपकरणों और फ़ीड की आवश्यकता होगी।
  4. उपलब्ध सीपियों में एक छोटी सी शल्य क्रिया (सर्जरी) द्वारा 4 से 6 मि.मि. व्यास के कण/नाभिक (नूक्लीअस) आरोपित किए जाते हैं।
  5. ये नाभिक कई प्रकार के होते हैं और उनपर ही मोती की गुणवत्ता निर्भर करती है।
  6. समुचित देख रेख में नाभिक युक्त सीपियों को विशेष प्रकार की जालियों में डालकर तालाब में बढ़ने के लिए डालना होता है।
    लगभग 8 से 10 महीनों तक तलाब में रहने के बाद स्वस्थ सीपियों में व्यापार योग्य मोती बन जाते हैं।
  7. कई बार अधिक गुणवत्ता के लिए मोती को और भी अधिक महीनों तक सीप में बढ़ने दिया जाता है।

रोचक तथ्य है कि एक नाभिक युक्त सीपी पाने का खर्च लगभग 20 से 40 रुपये है जबकि इसमें विकसित होने वाले एक 20 मि.मि. आकार के मोती की कीमत 100 से 1500 रुपये तक हो सकती है। मोती लेने के बाद भी इन सीपियों को अन्य उपयोग में लाया जा सकता है। और तो और सीपियाँ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती हैं।

Shopping cart

0
image/svg+xml

No products in the cart.

Continue Shopping